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अमावस्या 2026 — सभी अमावस्या तिथियाँ

12 अमावस्या तिथियाँ, महत्व और पितृ कर्म सहित

Acharya Suryakanth Subramaniam

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अगली अमावस्या

Somvati Amavasya (Margashirsha Amavasya)

सोमवार, 9 नवंबर 2026

अमावस्या नवचंद्र का दिन है — तीसवीं तिथि, जब चंद्रमा दिखाई नहीं देता। यह प्रत्येक चांद्र मास में एक बार आती है, इस प्रकार 2026 में 12 अमावस्या तिथियाँ हैं। वैदिक परंपरा में यह पितरों से जुड़ने का सर्वाधिक प्रभावी दिन है।

वर्ष की सर्वाधिक महत्वपूर्ण अमावस्या महालया अमावस्या (पितृ पक्ष अमावस्या, सितंबर) है, जब सभी हिन्दू परंपरागत रूप से अपने पूर्वजों को तर्पण अर्पित करते हैं। दीपावली अमावस्या (कार्तिक, अक्टूबर/नवंबर) वर्ष के सबसे बड़े पर्व की रात्रि है।

शनिवार को पड़ने वाली अमावस्या शनि अमावस्या कहलाती है — शनि की उपासना और बाधा-निवारण के लिए विशेष महत्वपूर्ण। सोमवार को पड़ने वाली अमावस्या सोमवती अमावस्या कहलाती है — सुहागिन स्त्रियों के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है।

मासनामतिथिविशेष
जनवरी

Pausha Amavasya

रविवार, 18 जन॰
फ़रवरी

Mauni Amavasya

मंगलवार, 17 फ़र॰मौनी
मार्च

Phalguna Amavasya

गुरुवार, 19 मार्च
अप्रैल

Chaitra Amavasya

शुक्रवार, 17 अप्रैल
मई

Shani Amavasya (Vaishakha Amavasya)

शनिवार, 16 मईशनि
जून

Somvati Amavasya (Jyeshtha Amavasya)

सोमवार, 15 जूनसोमवती
जुलाई

Ashadha Amavasya

मंगलवार, 14 जुल॰
अगस्त

Shravana Amavasya

बुधवार, 12 अग॰
सितंबर

Mahalaya Amavasya

शुक्रवार, 11 सित॰
अक्टूबर

Shani Amavasya (Diwali Amavasya)

शनिवार, 10 अक्टू॰दीपावली
नवंबर

Somvati Amavasya (Margashirsha Amavasya)अगली

सोमवार, 9 नव॰सोमवती
दिसंबर

Pausha Amavasya

मंगलवार, 8 दिस॰

✓ अमावस्या पर करने योग्य

  • पितरों को पितृ तर्पण (जल + तिल) अर्पित करें
  • सम्भव हो तो श्राद्ध कर्म करें
  • पूरे दिन (या चंद्रोदय तक) व्रत रखें
  • शिव, हनुमान या दुर्गा मंदिर के दर्शन करें
  • ज़रूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या धन दान करें
  • संध्या समय दीपक जलाएँ
  • पितृ स्तोत्र या महामृत्युंजय मंत्र का पाठ करें

✗ अमावस्या पर वर्जित

  • नया कार्य या व्यापार आरंभ करना
  • महत्वपूर्ण अनुबंध या करार पर हस्ताक्षर
  • लंबी यात्रा (विशेषकर रात्रि में)
  • नए घर में प्रवेश
  • विवाह या सगाई के संस्कार
  • बाल या नाखून काटना
  • मांसाहार का सेवन

पितृ तर्पण के बारे में

तर्पण अपने दिवंगत पितरों को जल (तिल, कुशा और पुष्प सहित) अर्पित करने का अनुष्ठान है। यह नदी, सरोवर या जल-पात्र में खड़े होकर, दक्षिण दिशा (पितरों की दिशा) की ओर मुख करके किया जाता है। मान्यता है कि यह अर्पण पितरों तक पहुँचता है और उन्हें तृप्ति देता है, परलोक में उनकी सहायता करता है। महालया अमावस्या इस अनुष्ठान का सर्वाधिक महत्वपूर्ण दिन है — जो इसे प्रतिमास नहीं कर पाते, उनसे भी इस दिन करने की अपेक्षा की जाती है।

अमावस्या — सामान्य प्रश्न

अमावस्या शुभ है या अशुभ?

अमावस्या प्रभावशाली किंतु द्विस्वभावी है। नए कार्यों के लिए अशुभ, परंतु पितृ कर्म, दान और साधना के लिए अत्यंत शुभ। नवचंद्र की ऊर्जा हर संकल्प को बढ़ाती है, अतः उसे पितृ पूजा और भक्ति की ओर लगाएँ।

अमावस्या पर कौन-से अनुष्ठान किए जाते हैं?

पितृ तर्पण (पितरों को जल अर्पण), श्राद्ध कर्म (पितरों के निमित्त ब्राह्मण भोजन), मंदिर दर्शन, व्रत और दान। विशेषकर महालया अमावस्या पर सभी हिन्दू परंपरागत रूप से तर्पण करते हैं।

क्या अमावस्या पर नया कार्य आरंभ कर सकते हैं?

सामान्यतः नहीं — नए आरंभ के लिए यह अशुभ है। अपवाद दीपावली अमावस्या है, जब लक्ष्मी पूजन और नए बही-खाते आरंभ करना (व्यापारिक परंपरा में) अत्यंत शुभ माना जाता है।

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