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एकादशी 2026 — संपूर्ण तिथि सूची

सभी 23 एकादशी तिथियाँ, नाम और व्रत विधि सहित

Acharya Suryakanth Subramaniam

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अगली एकादशी

Devshayani

शनिवार, 25 जुलाई 2026

एकादशी हिन्दू चांद्र पंचांग में प्रत्येक पक्ष की ग्यारहवीं तिथि है। यह मास में दो बार आती है — एक बार शुक्ल पक्ष में और एक बार कृष्ण पक्ष में — इस प्रकार वर्ष में कुल 24 एकादशी होती हैं (अधिक मास वाले वर्ष में कभी-कभी 26)।

प्रत्येक एकादशी का अपना नाम, अधिष्ठाता देवता और पुराणों में वर्णित विशिष्ट महत्व है। श्रद्धालु मन की शुद्धि, तामसिक आहार के संचय को घटाने और भगवान विष्णु की कृपा हेतु एकादशी का व्रत रखते हैं। व्रत का पारण अगले प्रातः (द्वादशी को) पारण काल में किया जाता है।

24 एकादशियों में निर्जला एकादशी (ज्येष्ठ मास, जून की निर्जल व्रत) सभी 24 के समान पुण्य देती है। जुलाई की देवशयनी एकादशी से चातुर्मास आरंभ होता है — वे चार शुभ मास जिनमें भगवान विष्णु शयन करते हैं — और नवंबर की देवउठनी एकादशी उनके जागरण का दिन है।

मासएकादशी का नामतिथिपक्ष
जनवरी

Shattila

तिल के छह उपयोग — दान, स्नान, अर्पण, सेवन, उबटन और पूजन — समस्त पापों का नाश करते हैं।

14 जन॰कृष्ण
जनवरी

Pausha Putrada

सुयोग्य एवं धर्मनिष्ठ पुत्र का वरदान देती है। दक्षिण भारत में इसे वैकुंठ एकादशी भी कहा जाता है।

29 जन॰शुक्ल
फ़रवरी

Vijaya

भगवान राम ने लंका की ओर प्रस्थान से पूर्व यह व्रत रखा था। यह शत्रुओं और बाधाओं पर विजय दिलाती है।

13 फ़र॰कृष्ण
फ़रवरी

Jaya

अनेक जन्मों में संचित पापों का नाश करती है। श्रद्धापूर्वक इसका पालन करने से भक्त को मुक्ति मिलती है।

27 फ़र॰शुक्ल
मार्च

Papamochani

भक्त को समस्त पापों से मुक्त करती है (पाप मोचन = पाप से छुटकारा)। फाल्गुन के अंत में मनाई जाती है।

15 मार्चकृष्ण
मार्च

Amalaki

इस दिन आँवले के वृक्ष की पूजा करना समस्त तीर्थयात्राओं के समान फल देता है।

29 मार्चशुक्ल
अप्रैल

Varuthini

धर्म का कवच (वरूथिनी) धारण करने का दिन। यह सुख, समृद्धि और मुक्ति प्रदान करती है।

13 अप्रैलकृष्ण
अप्रैल

Kamada

समस्त कामनाओं की पूर्ति करती है (काम = इच्छा)। ब्रह्म-हत्या के पाप को भी दूर करती है।

27 अप्रैलशुक्ल
मई

Apara

अपार (असीम) पुण्य देने वाली। ब्रह्म-हत्या जैसा पाप भी नष्ट हो जाता है।

13 मईकृष्ण
मई

Mohini

निषिद्ध दिनों में अन्न ग्रहण करने के दोष को दूर करती है। इसी दिन विष्णु ने मोहिनी रूप धारण किया था।

26 मईशुक्ल
जून

Yogini

शरीर और मन के समस्त रोगों को दूर करती है। कुबेर के माली हेममाली की कथा इससे जुड़ी है।

11 जूनकृष्ण
जून

Nirjala

सबसे कठिन एकादशी — निर्जल व्रत, जिसका फल चौबीसों एकादशियों के सम्मिलित फल के बराबर माना जाता है।

25 जूनशुक्ल
जुलाई

Devshayaniअगली

विष्णु चार महीनों (चातुर्मास) के लिए योग निद्रा में चले जाते हैं। चातुर्मास में शुभ कार्यों का आरंभ वर्जित रहता है।

25 जुल॰शुक्ल
अगस्त

Aja

इसे अन्नदा एकादशी भी कहा जाता है। इसका व्रत अश्वमेध यज्ञ करने के समान पुण्य देता है।

9 अग॰कृष्ण
अगस्त

Putrada

वर्ष की दूसरी पुत्रदा एकादशी। संतान-सुख की कामना रखने वाले दंपती इसे विशेष रूप से करते हैं।

23 अग॰शुक्ल
सितंबर

Indira

विशेष रूप से निम्न लोकों में अटके पूर्वजों की मुक्ति के लिए। पितृ पक्ष के दौरान मनाई जाती है।

7 सित॰कृष्ण
सितंबर

Parivartini

विष्णु अपनी योग निद्रा में करवट बदलते हैं। यह चातुर्मास के मध्य बिंदु का प्रतीक है। तुलसी रोपण आरंभ होता है।

22 सित॰शुक्ल
अक्टूबर

Rama

समस्त पापों और सांसारिक दुःखों को दूर करती है। दीपावली से ग्यारह दिन पहले मनाई जाती है।

6 अक्टू॰कृष्ण
अक्टूबर

Papankusha

बड़े से बड़ा पापी भी पवित्र हो जाता है। इस एकादशी का अंकुश समस्त पापों को भेद देता है।

22 अक्टू॰शुक्ल
नवंबर

Utpanna

इसी दिन एकादशी देवी भगवान विष्णु से प्रकट होकर मुरन नामक दैत्य का संहार करती हैं। यही एकादशी व्रत का उद्गम है।

5 नव॰कृष्ण
नवंबर

Devutthana

विष्णु योग निद्रा से जागते हैं। यह चातुर्मास की समाप्ति का प्रतीक है। तुलसी विवाह किया जाता है। सर्वाधिक शुभ विवाह मुहूर्त यहीं से आरंभ होते हैं।

21 नव॰शुक्ल
दिसंबर

Saphala

समस्त कार्यों में सफलता (सफल) प्रदान करती है। महापापी लुम्पक के उद्धार की कथा इससे जुड़ी है।

4 दिस॰कृष्ण
दिसंबर

Mokshada

पूर्वजों को मोक्ष प्रदान करती है। गीता जयंती — इसी दिन भगवद्गीता का उपदेश हुआ था।

20 दिस॰शुक्ल

एकादशी — सामान्य प्रश्न

एकादशी कब आरंभ और समाप्त होती है?

एकादशी ग्यारहवीं तिथि के आरंभ से लगती है और बारहवीं तिथि (द्वादशी) के आरंभ पर समाप्त होती है। सटीक समय नगर और दिन के अनुसार भिन्न होता है। पारण काल द्वादशी को सूर्योदय के पश्चात का शुभ समय है, जिसमें व्रत तोड़ना आवश्यक है — आदर्श रूप से सूर्योदय के 2 घंटे के भीतर।

क्या एकादशी को भोजन कर सकते हैं?

सबसे कठोर रूप (निर्जला) में जल भी वर्जित है। अधिकांश श्रद्धालु फलाहार और दुग्ध का व्रत रखते हैं, चावल, गेहूँ, सेम और दालों का पूर्ण त्याग करते हैं। व्रत न रखने वाले परिजन सामान्य भोजन कर सकते हैं। अगले प्रातः पारण काल में व्रत खोलें।

शुक्ल और कृष्ण एकादशी में क्या अंतर है?

शुक्ल एकादशी शुक्ल पक्ष (उजाले पक्ष) की ग्यारहवीं तिथि को पड़ती है, जबकि कृष्ण एकादशी कृष्ण पक्ष (अँधेरे पक्ष) की ग्यारहवीं तिथि को। दोनों समान रूप से पवित्र हैं। वर्ष की सभी 24 एकादशियाँ मनाई जाती हैं।

सबसे महत्वपूर्ण एकादशी कौन-सी है?

निर्जला एकादशी (जून) सभी 24 एकादशियों के समान पुण्य देती है। देवशयनी एकादशी (जुलाई) से चातुर्मास आरंभ होता है। दक्षिण भारत में वैकुंठ एकादशी (दिसंबर–जनवरी) सर्वाधिक मनाई जाती है।

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