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पंचक 2026 — तिथियाँ और समय

सभी समय भारतीय मानक समय (IST) में · पूरे भारत में समान

इस समय

इस समय पंचक नहीं है

अगला पंचक शुक्र, 31 जुल॰ 2026, 6:39 am से आरंभ — 9 दिन में।

आगामी पंचक

शुक्र, 31 जुल॰ 2026, 6:39 am

मंगल, 4 अग॰ 2026, 9:55 pm तक

चोर पंचक

गुरु, 27 अग॰ 2026, 1:37 pm

मंगल, 1 सित॰ 2026, 3:25 am तक

दोष रहित

बुध, 23 सित॰ 2026, 9:58 pm

सोम, 28 सित॰ 2026, 10:17 am तक

दोष रहित

बुध, 21 अक्टू॰ 2026, 7:01 am

रवि, 25 अक्टू॰ 2026, 7:23 pm तक

दोष रहित

मंगल, 17 नव॰ 2026, 3:31 pm

रवि, 22 नव॰ 2026, 5:56 am तक

अग्नि पंचक

सोम, 14 दिस॰ 2026, 10:37 pm

शनि, 19 दिस॰ 2026, 3:59 pm तक

राज पंचक

सोम, 11 जन॰ 2027, 4:36 am

शुक्र, 15 जन॰ 2027, 11:52 pm तक

राज पंचक

रवि, 7 फ़र॰ 2027, 10:37 am

शुक्र, 12 फ़र॰ 2027, 5:43 am तक

रोग पंचक

पंचक क्या है?

पंचक लगभग पाँच दिन की वह अवधि है जिसमें चंद्रमा अंतिम दो राशियों — कुंभ और मीन — में भ्रमण करता है; अथवा यों कहें कि धनिष्ठा के उत्तरार्ध से लेकर रेवती के अंत तक। दोनों परिभाषाएँ एक ही अंश-खंड बताती हैं, क्योंकि धनिष्ठा का तीसरा पाद ठीक 0° कुंभ से आरंभ होता है। इसमें पाँच नक्षत्र आते हैं — नाम भी वहीं से पड़ा है।

पंचक हर कार्य पर रोक नहीं है। शास्त्रीय परंपरा में केवल कुछ निश्चित कार्य ही वर्जित माने गए हैं:

  • छत डालना अथवा लेंटर-स्लैब ढालना
  • ईंधन और लकड़ी खरीदना या संग्रह करना
  • दक्षिण दिशा की यात्रा
  • चारपाई या पलंग बनवाना अथवा खरीदना
  • शास्त्रोक्त उपाय किए बिना दाह-संस्कार

सामान्य कामकाज, पूजा-पाठ, अध्ययन तथा दक्षिण दिशा को छोड़कर अन्य दिशाओं की यात्रा वर्जित नहीं है।

पाँच प्रकार

प्रकार उसी वार से तय होता है जिस दिन पंचक आरंभ होता है।

रविवाररोग पंचक — अस्वस्थता से संबंधित; उपचार से जुड़ा अथवा अत्यधिक श्रम वाला नया कार्य आरंभ करने से बचें।
सोमवारराज पंचक — सामान्यतः शुभ माना गया है; शासकीय और प्रशासनिक कार्य अच्छे फल देते हैं।
मंगलवारअग्नि पंचक — अग्नि का भय; चूल्हा-भट्टी की स्थापना, वेल्डिंग, यंत्र-मशीनरी और मुकदमेबाज़ी से बचें।
शुक्रवारचोर पंचक — चोरी अथवा हानि की आशंका; बड़े लेन-देन और यात्रा में मूल्यवान वस्तुएँ साथ ले जाने से बचें।
शनिवारमृत्यु पंचक — सर्वाधिक कठोर माना गया है; जोखिम भरे कार्य और यात्रा यथासंभव टाल दें।
बुध / गुरुबुधवार और गुरुवार को आरंभ होने वाले पंचक में शास्त्रीय परंपरा के अनुसार कोई दोष नहीं होता।
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